कर्मियों के बच्चों की प्रतिभा को पहचान दे रहे सफाई इंस्पेक्टर रवि शेखर, रायबरेली में बनी चर्चा का विषय

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स

रायबरेली नगर पालिका परिषद में तैनात सफाई निरीक्षक रवि शेखर इन दिनों शहरभर में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। वजह सिर्फ उनकी कार्यशैली नहीं, बल्कि उनके मानवीय और सामाजिक दृष्टिकोण हैं। आमतौर पर निरीक्षक का काम सिर्फ सफाई व्यवस्था तक सीमित माना जाता है, मगर रवि शेखर ने यह साबित कर दिया है कि एक संवेदनशील नेतृत्व अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों के जीवन में भी बदलाव ला सकता है।

नगर पालिका के कर्मचारियों का कहना है कि अब तक उन्होंने ऐसा कोई इंस्पेक्टर नहीं देखा जो इस तरह भाईचारे के साथ उनकी बातें सुने और समाधान की कोशिश करे। कर्मचारियों के अनुसार रवि शेखर जरूरत पड़ने पर खुद सामने आकर उन्हें मार्गदर्शन देते हैं और विभागीय जानकारियाँ सरल भाषा में समझाते हैं। यही वजह है कि उन्हें सफाई कर्मियों का विश्वास और सम्मान दोनों मिला है।

हाल ही में नवरात्रि पर्व पर किला बाजार में आयोजित सफाई कर्मचारियों के कार्यक्रम में रवि शेखर बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। कार्यक्रम में सफाई कर्मियों के बच्चों ने अपनी कला और हुनर का प्रदर्शन किया। किसी ने गाना गाया, किसी ने नृत्य किया, तो किसी ने मंच पर अभिनय से सबका दिल जीत लिया। यह नज़ारा देखकर रवि शेखर अभिभूत हो गए और उन्होंने कहा कि इन बच्चों में छिपी प्रतिभा किसी से कम नहीं है।

उन्होंने कहा, “अगर इन बच्चों को थोड़ी सी सही दिशा और अवसर दिया जाए तो ये आने वाले समय में न सिर्फ रायबरेली बल्कि प्रदेश और देश का भी नाम रोशन कर सकते हैं। मेरी कोशिश होगी कि अपनी क्षमता और संसाधनों से इन्हें आगे बढ़ने के अवसर दिला सकूँ।”

उनका यह वक्तव्य सिर्फ एक औपचारिक घोषणा नहीं थी, बल्कि एक गंभीर प्रतिबद्धता की झलक थी। उन्होंने साफ कहा कि वे शिक्षा और कला के क्षेत्र में इन होनहार बच्चों की मदद के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।

स्थानीय लोग भी इस बात से सहमत हैं कि सदियों पुरानी पालिका में पहली बार कोई सफाई इंस्पेक्टर ऐसा आया है, जो कर्मचारियों को केवल अधीनस्थ मानकर नहीं, बल्कि परिवार की तरह देखता है। यही कारण है कि अब कर्मचारी खुलकर अपनी समस्याएँ साझा करते हैं और समाधान की उम्मीद रखते हैं।

रवि शेखर का यह दृष्टिकोण यह साबित करता है कि असली नेतृत्व वही है, जो केवल दफ्तर तक सीमित न रहे, बल्कि अपने अधीन काम करने वाले लोगों और उनके परिवारों की भावनाओं को भी समझे। उन्होंने दिखा दिया है कि “लीडरशिप विद हार्ट” (Leadership with Heart) का असली मतलब क्या होता है।

सोशल मीडिया पर भी रवि शेखर के इस प्रयास की खूब चर्चा हो रही है। लोग उनकी इस पहल को सराहते हुए कह रहे हैं कि अगर हर अधिकारी इसी तरह से अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए सोचे तो समाज में सकारात्मक बदलाव आना तय है।

कर्मियों के बच्चों की प्रतिभा को मंच देने की यह कोशिश न सिर्फ रायबरेली के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि मेहनतकश लोगों के परिवारों में भी अनमोल हीरे छिपे होते हैं। जरूरत बस उन्हें पहचानने और तराशने की है।


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