डंपर की चपेट में अधेड़ की मौत, आक्रोशित ग्रामीणों का जाम, भारी पुलिस बल तैनात

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स
रायबरेली, 16 सितम्बर 2025

रायबरेली जिले के सरेनी थाना क्षेत्र के भोजपुर चौकी अंतर्गत सोमवार की सुबह एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को हिला दिया। तेज रफ्तार और लापरवाही से दौड़ते डंपर ने एक अधेड़ व्यक्ति को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और जाम लगाकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। घटना के बाद पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है।


चाय पीकर लौट रहे थे घर, डंपर ने छीनी जान

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुबह लगभग 8 बजे मुन्ना मिश्रा (55 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय दयाराम मिश्रा, निवासी चन्द्रमणीखेड़ा गांव, पास के चौराहे पर चाय पीकर अपने घर लौट रहे थे। तभी ऊंचगांव की ओर से गिट्टियों से लदा डंपर (UP 33 CT 3328) तेज रफ्तार से आया और अनियंत्रित होकर पीछे से टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी भीषण थी कि मुन्ना मिश्रा डंपर के पहियों के नीचे आ गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार डंपर चालक बेतहाशा स्पीड में गाड़ी चला रहा था और हादसे के समय उसने वाहन पर नियंत्रण खो दिया।


ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, सड़क पर लगा जाम

हादसे की सूचना जैसे ही गांव में पहुंची, सैकड़ों की संख्या में लोग मौके पर इकट्ठा हो गए। देखते ही देखते सड़क पर जाम लग गया और लोग प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस मार्ग पर आए दिन डंपर और ट्रक बेकाबू रफ्तार से दौड़ते हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासन मूकदर्शक बने रहते हैं। उनका कहना है कि अगर जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई की होती तो यह हादसा नहीं होता।

ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक दोषी चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती और भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक नहीं लगती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।


पुलिस-प्रशासन की मुश्किलें बढ़ीं

हादसे की सूचना पर भोजपुर चौकी और सरेनी कोतवाली पुलिस भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और डंपर को जब्त कर लिया। चालक को भी हिरासत में ले लिया गया है।

हालांकि, पुलिस अधिकारियों द्वारा समझाने के बाद भी ग्रामीणों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। गुस्साई भीड़ ने सड़क से जाम हटाने से इंकार कर दिया, जिसके चलते कई घंटे तक यातायात पूरी तरह से बाधित रहा।

स्थिति को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन आक्रोश अब भी थमा नहीं है।


गांव में मातमी सन्नाटा

मुन्ना मिश्रा की मौत की खबर से पूरा गांव सदमे में है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी और बच्चों की चीख-पुकार सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि अगर प्रशासन समय रहते तेज रफ्तार वाहनों पर अंकुश लगाता तो आज यह दर्दनाक घटना नहीं होती। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अब वे चुप नहीं बैठेंगे और स्थायी समाधान की मांग करेंगे।


हादसों का काला इतिहास

यह पहला मौका नहीं है जब भोजपुर-ऊंचगांव मार्ग पर इस तरह का हादसा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर हाई-स्पीड डंपर और ट्रक आए दिन लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं।

पिछले एक साल में इस रूट पर कई बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए। यही वजह है कि लोगों का गुस्सा इस बार और भड़क उठा है।


जिम्मेदार कौन?

ग्रामीणों का कहना है कि हादसे की जिम्मेदारी सिर्फ डंपर चालक की नहीं है बल्कि प्रशासन और खनन माफिया की मिलीभगत भी है।

लोगों का आरोप है कि ओवरलोड डंपरों को खुली छूट मिली हुई है। यह वाहन बिना रोक-टोक के न सिर्फ सड़कों को नुकसान पहुंचा रहे हैं बल्कि आम लोगों की जान से भी खेल रहे हैं।


आक्रोश के पीछे की बड़ी मांगें

ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने कुछ बड़ी मांगें रखीं –

  1. दोषी डंपर चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
  2. मृतक के परिवार को मुआवजा और सरकारी मदद दी जाए।
  3. भोजपुर-ऊंचगांव मार्ग पर भारी वाहनों का आवागमन बंद किया जाए।
  4. सड़क पर स्पीड ब्रेकर और पुलिस चौकी की व्यवस्था की जाए।
  5. खनन माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।

प्रशासन की सफाई

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए डंपर को जब्त कर लिया गया है और चालक को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात है।

अधिकारियों ने लोगों को आश्वासन दिया है कि मृतक के परिवार को हर संभव सहायता दी जाएगी और आगे ऐसे हादसों पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए जाएंगे।


माहौल तनावपूर्ण, पर निगरानी कड़ी

शाम तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। ग्रामीणों के गुस्से और सड़क जाम के चलते प्रशासन के पसीने छूट गए। यातायात कई घंटों तक बाधित रहा और आसपास के गांवों में भी आक्रोश फैल गया।

फिलहाल इलाके में पुलिस-प्रशासन की पैनी निगरानी बनी हुई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।


निष्कर्ष

रायबरेली का यह सड़क हादसा एक बार फिर प्रशासन की लापरवाही और तेज रफ्तार डंपरों की बेलगाम दौड़ को उजागर करता है।

55 वर्षीय मुन्ना मिश्रा की मौत ने न सिर्फ उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि पूरे गांव को आक्रोश और शोक से भर दिया है। ग्रामीणों की मांगें साफ हैं – वे अब सुरक्षित सड़कें और न्याय चाहते हैं।

सरकार और प्रशासन पर अब यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वह इस घटना से सबक ले और लोगों को भरोसा दिलाए कि आगे ऐसी घटनाएं न हों।


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