रायबरेली में विद्युत विभाग की विजिलेंस छापेमारी पर विवाद – धन उगाही और अभद्रता के आरोप

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रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली उत्तर प्रदेश कड़क 29 अगस्त 2025


छापेमारी या वसूली? – रायबरेली में बढ़ा हड़कंप

रायबरेली के छोटा घोसियाना और आसपास के मोहल्लों – सत्य नगर, चंद्र नगर, मधुबन और निराला नगर – में पिछले दो महीनों से विद्युत विभाग की एक कथित विजिलेंस टीम सुबह-सुबह छापेमारी कर रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कार्रवाई बिजली चोरी रोकने के बजाय धन उगाही का नया तरीका बन गई है। सुबह 4:00 बजे से 5:00 बजे के बीच की जाने वाली यह कार्रवाई लोगों के लिए परेशानी और डर का सबब बन गई है।


स्थानीय निवासियों की शिकायतें

अनधिकृत प्रवेश

निवासियों का कहना है कि टीम में शामिल दो वर्दीधारी पुलिसकर्मी (एक महिला और एक पुरुष) तथा एक व्यक्ति, जो खुद को विद्युत विभाग का अधिकारी बताता है, बिना अनुमति घरों में घुस जाते हैं।

महिलाओं के साथ अभद्रता

लोगों का कहना है कि सुबह-सुबह जब घरों में महिलाएं सो रही होती हैं, तब भी टीम सीधे अंदर चली जाती है। इस दौरान गोपनीयता और शालीनता का ध्यान नहीं रखा जाता, जिससे महिलाओं के साथ अभद्रता के आरोप लग रहे हैं।

धन उगाही के आरोप

स्थानीय लोगों ने दावा किया कि टीम बिजली चोरी या अन्य उल्लंघनों का हवाला देकर नकद वसूली करती है। पिछले दो महीनों से रोजाना लाखों रुपये की उगाही हो रही है, लेकिन किसी भी परिवार को पक्की रसीद नहीं दी जाती।


छापेमारी का असामान्य समय

सुबह 4:00 बजे का समय छापेमारी के लिए न तो सामान्य है और न ही सुरक्षित। लोगों का कहना है कि इस समय घरों में बच्चे और बुजुर्ग सो रहे होते हैं। अचानक टीम के प्रवेश से परिवारों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।


आज की घटना

29 अगस्त 2025 की सुबह भी यही टीम छोटा घोसियाना में पहुंची। मीडिया ने जब मौके पर जाकर सवाल पूछे तो विजिलेंस टीम के एक जूनियर इंजीनियर (JE) ने दावा किया कि यह अभियान विद्युत खंड प्रथम रायबरेली के आदेश पर चलाया जा रहा है।

लेकिन टीम के पास कोई लिखित अनुमति पत्र या आधिकारिक दस्तावेज नहीं मिला। इस वजह से स्थानीय लोगों ने इसे संदिग्ध और भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला बताया।


स्थानीय लोगों में आक्रोश

लगातार दो महीने से चल रही कार्रवाई से सत्य नगर, चंद्र नगर, मधुबन, निराला नगर और छोटा घोसियाना के लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
लोगों का कहना है कि:

  • अगर बिजली चोरी पकड़नी है तो दिन में नियमपूर्वक जांच हो।
  • बिना अनुमति घर में प्रवेश करना कानूनन अपराध है।
  • यह कार्रवाई सिर्फ नकद वसूली के लिए की जा रही है।

कानूनी पहलू

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • किसी भी सरकारी विभाग को बिना पूर्व सूचना और आदेश के इस तरह की छापेमारी का अधिकार नहीं है।
  • महिलाओं की निजता और गरिमा का उल्लंघन भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अपराध है।
  • नकद वसूली अगर साबित होती है तो यह भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का मामला बनेगा।

विद्युत विभाग की चुप्पी

अब तक विद्युत खंड प्रथम रायबरेली की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जेई द्वारा कही गई बातों की भी पुष्टि नहीं हो सकी है। इससे लोगों का संदेह और गहराता जा रहा है।


लोगों की मांग

निवासियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

  1. विजिलेंस टीम की पहचान और आदेश पत्र सार्वजनिक किया जाए।
  2. पिछले दो महीनों में हुई वसूली की जांच हो।
  3. महिलाओं की सुरक्षा और गोपनीयता का ध्यान रखा जाए।
  4. अगर धन उगाही साबित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

निष्कर्ष

रायबरेली में विजिलेंस छापेमारी का यह मामला केवल बिजली चोरी रोकने तक सीमित नहीं है। इसमें भ्रष्टाचार, धन उगाही, निजता का उल्लंघन और महिलाओं के साथ अभद्रता जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

यदि प्रशासन ने इस पर जल्द कार्रवाई नहीं की तो यह मामला बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। लोगों का कहना है कि यह छापेमारी नहीं बल्कि सीधा उत्पीड़न है। अब देखना है कि सरकार और विभाग इस विवाद पर क्या कदम उठाते हैं।


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