ऊंचाहार, रायबरेली।
सनातन धर्म और संत परंपरा पर समाज को मार्गदर्शन देने वाले प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य शांतनु महाराज ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सभी संत समान हैं और वे सभी सनातन धर्म के उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी संत की आलोचना करना न केवल गलत है बल्कि इससे समाज में गलत संदेश जाता है और सनातन धर्म पर प्रश्नचिह्न लगते हैं।
प्रयागराज जाते समय ऊंचाहार नगर स्थित एक होटल में आयोजित अभिनंदन समारोह के दौरान महाराज ने अपने अनुयायियों को संबोधित करते हुए कहा कि “हमें केवल अपनी साधना और अपने विचारों पर ध्यान देना चाहिए। दूसरों की आलोचना करने से न तो समाज को लाभ होता है और न ही धर्म का उत्थान होता है। सभी संत भगवत भजन में लीन हैं और यही उनकी असली पहचान है।”
संतों की आलोचना क्यों नहीं करनी चाहिए
आचार्य शांतनु महाराज ने कहा कि जब कोई संत दूसरे संत की आलोचना करता है तो समाज में भ्रम और मतभेद की स्थिति उत्पन्न होती है। इससे धर्म कमजोर होता है और विरोधी तत्वों को सनातन पर उंगली उठाने का अवसर मिलता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार एक ही आकाश में अलग-अलग तारे अपनी रोशनी बिखेरते हैं, उसी प्रकार संत भी अलग-अलग रूपों में एक ही उद्देश्य—धर्म और मानवता की सेवा—के लिए कार्य करते हैं। इसलिए हमें उनके प्रति सम्मान रखना चाहिए।
आज के समय में जब सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियां और विवाद तेजी से फैलते हैं, संतों और धर्मगुरुओं को चाहिए कि वे इस जाल में फंसने के बजाय समाज को एकजुट करने पर जोर दें।
जन्मदिवस पर हुआ अभिनंदन समारोह
इस मौके पर भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रांतीय मंत्री अभिलाष चंद कौशल ने महाराज जी का जन्मदिवस मनाने के लिए विशेष अभिनंदन समारोह आयोजित किया। कार्यक्रम में भारी संख्या में भक्त और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
समारोह में क्षेत्र पंचायत सदस्य मनीष कौशल, वरिष्ठ पत्रकार बिंदेश्वरी तिवारी, भाजपा मंडल अध्यक्ष पवन सिंह, गुड्डन यादव, अनिल यादव, डा. शिवकुमार त्रिपाठी, कोतवाल संजय कुमार, चौकी इंचार्ज वागीश मिश्र, गायक मनोज अग्रहरि, प्रधान गुड्डू यादव समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सभी ने आचार्य शांतनु महाराज का माल्यार्पण कर आशीर्वाद लिया।
महाराज जी का संदेश समाज के लिए क्यों जरूरी
भारत की संत परंपरा सदियों से समाज को एकजुट करती आई है। रामानुजाचार्य, शंकराचार्य, तुलसीदास, कबीरदास जैसे संतों ने हमेशा भक्ति और एकता का संदेश दिया।
आज के समय में जब समाज धर्म, जाति और राजनीति के आधार पर बंटा हुआ है, ऐसे में शांतनु महाराज का यह संदेश बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि—
- सभी संत समान हैं, चाहे उनका मार्ग अलग-अलग क्यों न हो।
- धर्म का उत्थान तभी संभव है जब हम आलोचना छोड़कर भक्ति और साधना पर ध्यान दें।
- समाज में गलत संदेश देने वाले बयानों से बचना चाहिए।
सनातन धर्म पर उठते सवाल और संतों की भूमिका
पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि विभिन्न मंचों पर संतों के बीच मतभेद सार्वजनिक हो जाते हैं। इससे सनातन धर्म की एकजुटता पर प्रश्नचिह्न लगता है।
आचार्य शांतनु महाराज ने इस प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सनातन धर्म को बचाना और मजबूत करना हर संत और हर भक्त का कर्तव्य है। जब हम एक-दूसरे का सम्मान करेंगे तभी समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और आने वाली पीढ़ियां धर्म से जुड़ी रहेंगी।
सोशल मीडिया और आधुनिक संदर्भ
आजकल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम पर संतों के विचार बड़ी तेजी से वायरल होते हैं। कई बार अनजाने में दिए गए बयान या आपसी बहस समाज में विवाद का रूप ले लेते हैं।
महाराज ने कहा कि संतों को चाहिए कि वे इन मंचों का उपयोग सकारात्मक संदेश, प्रेरणादायक विचार और धार्मिक एकता फैलाने के लिए करें, न कि आलोचना और नकारात्मकता फैलाने के लिए।
क्या बोले अनुयायी
समारोह में मौजूद अनुयायियों ने कहा कि आचार्य शांतनु महाराज का यह संदेश हर किसी के दिल को छू गया। भक्तों ने कहा कि आज के समय में जब समाज में नफरत और विवाद बढ़ रहे हैं, ऐसे में संतों को ही एकता और भाईचारे का मार्ग दिखाना होगा।
निष्कर्ष
आचार्य शांतनु महाराज का यह संदेश न केवल संतों बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि—
“हमें केवल अपनी साधना करनी चाहिए, दूसरों की आलोचना नहीं। सभी संत भगवत भजन में लीन हैं और उनका सम्मान करना ही असली धर्म है।”
यह विचार समाज को शांति, एकता और सकारात्मकता की दिशा में आगे बढ़ाने वाला है।





