रिपोर्ट: संदीप मिश्रा, रायबरेली, उत्तर प्रदेश, कड़क टाइम्स
रायबरेली में शुक्रवार को गणपति बप्पा मोरया के जयकारों के साथ भक्ति और उल्लास का माहौल देखने को मिला। 51 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अंतर्गत छोटी बाजार के राजा गणपति का विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई। इस शोभायात्रा ने न केवल भक्तों को भावविभोर किया बल्कि पूरे शहर को भक्ति की धारा से सराबोर कर दिया।
सुबह से ही शहर की गलियों और चौक-चौराहों पर भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी। ढोल-नगाड़ों और बैंड की धुनों पर श्रद्धालु नाचते-गाते आगे बढ़ते रहे। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी उत्साह और आस्था के साथ शोभायात्रा में शामिल हुए।
शोभायात्रा का मार्ग और आयोजन
शोभायात्रा की शुरुआत छोटी बाजार स्थित राधा कृष्ण मंदिर से हुई। इसके बाद यात्रा डबल फाटक, मछली बाजार, रेलवे स्टेशन, मंशा देवी मंदिर, घंटा घर, खोया मंडी, कैपिटल टॉकीज, बस स्टेशन, शहजादा कोठी रोड, अमरीश पुरी कॉलोनी से होते हुए राजघाट पहुंची।
हर स्थान पर श्रद्धालुओं ने बप्पा का स्वागत किया और प्रसाद वितरण किया गया। जगह-जगह पानी और शरबत की भी व्यवस्था रही।
51 साल की परंपरा
छोटी बाजार के राजा गणपति पूजा की परंपरा 51 साल पहले शुरू हुई थी। इस दौरान शहर के लोगों ने इसे सामाजिक और धार्मिक उत्सव के रूप में आगे बढ़ाया। इस बार 51वीं वर्षगांठ होने के कारण आयोजन और भी भव्य रहा।
भक्तों का उत्साह
हजारों की संख्या में लोग विसर्जन शोभायात्रा में शामिल हुए। जगह-जगह “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के नारे गूंजते रहे।
इस अवसर पर अन्नू कक्कड़, आलोक कपूर, मन्नू चौरसिया, अभिषेक कक्कड़, स्वस्तिक चौरसिया, घनश्याम साहू, खन्नू भाई, चुन्नू गुप्ता, राशु श्रीवास्तव, दिव्य कक्कड़, अतुल कक्कड़, अमन जी, मास्टर जी और अभिनव कक्कड़ सहित कई लोग और सेवादार मौजूद रहे।
घाट पर अंतिम आरती
राजघाट पर पहुंचकर गणपति बप्पा की अंतिम आरती मंत्रोच्चारण के बीच संपन्न हुई। इसके बाद मूर्ति का विधिवत विसर्जन किया गया। आरती के समय दीपों की रोशनी से पूरा घाट जगमगा उठा।
आयोजक का संदेश

कार्यक्रम आयोजक दिनेश चंद्र कक्कड़ ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला उत्सव है। उन्होंने बताया कि शहरवासियों के सहयोग से यह कार्यक्रम हर साल सफलतापूर्वक संपन्न होता है।
भावनात्मक विदाई
भक्तों ने विदाई के समय बप्पा से परिवार और समाज की खुशहाली की कामना की। हर कोई यही कहता नजर आया – “अगले बरस तू जल्दी आ बप्पा।”